चाइनीज मांझे से मौतों पर हाईकोर्ट सख्त राज्य सरकार से पूछा– घटना के बाद ही क्यों जागते हैं अधिकारी?

लखनऊ। चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और गंभीर हादसों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर हर घटना के बाद ही प्रशासनिक तंत्र सक्रिय क्यों होता है? हादसों को रोकने के लिए पहले से ठोस और प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश चौधरी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि चाइनीज मांझे की बिक्री और उसके उपयोग पर सख्ती से प्रतिबंध लागू किया जाए। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा कि केवल छापेमारी या औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर कारगर सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए।
खंडपीठ ने चाइनीज मांझे से घायल या मृत व्यक्तियों के परिजनों को मेडिकल सहायता और मुआवजा देने के मुद्दे पर भी विचार करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिए कि पीड़ितों को समयबद्ध उपचार और आवश्यक आर्थिक सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभिभावकों और बच्चों में जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि जब तक समाज में जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक केवल प्रशासनिक कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने तब तक राज्य सरकार से ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने के संकेत दिए हैं।



