अंतरराष्ट्रीय प्राइमेट दिवस पर विद्यार्थियों को बताई प्राइमेट्स की रोचक दुनिया

प्राइमेट्स की विविधता, सामाजिक व्यवहार और बुद्धिमत्ता पर हुआ विशेष शैक्षिक व्याख्यान
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय प्राइमेट दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्राइमेट्स की विविध एवं आकर्षक दुनिया से परिचित कराते हुए उनके जैविक स्वरूप, व्यवहार, आवास, सामाजिक जीवन और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि मनुष्य भी प्राइमेट्स का हिस्सा है और जैविक वर्गीकरण के अनुसार Great Apes में शामिल है। मानव और अन्य प्राइमेट्स के बीच पाई जाने वाली जैविक एवं व्यवहारिक समानताओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। विद्यार्थियों को Great Apes, Small Apes, Monkeys और Prosimians जैसे प्रमुख समूहों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही Old World और New World Monkeys के बीच प्रमुख अंतर भी सरल भाषा में बताए गए।

कार्यक्रम में विशेष रूप से समझाया गया कि हर Monkey एक Primate है, लेकिन हर Primate Monkey नहीं होता। विद्यार्थियों को प्राइमेट्स की शारीरिक संरचना और पेड़ों पर जीवन बिताने के लिए उनके शरीर में मौजूद विशेष अनुकूलनों के बारे में भी जानकारी दी गई। Gibbons और Spider Monkeys द्वारा शाखाओं के बीच झूलकर आगे बढ़ने की प्रक्रिया Brachiation को भी रोचक तरीके से समझाया गया।
व्याख्यान में प्राइमेट्स के सामाजिक संगठन और संचार के तरीकों पर भी चर्चा हुई। विभिन्न प्रजातियों में पाए जाने वाले multi-male, polygynous, monogamous और solitary social systems के बारे में बताया गया। इसके अलावा vocalization, facial expressions, body postures, touch और olfactory signals के जरिए प्राइमेट्स के संचार की जानकारी दी गई। Gibbons की जटिल vocalizations और विभिन्न प्राइमेट्स के threat gestures ने विद्यार्थियों की विशेष रुचि जगाई।
कार्यक्रम में प्राइमेट्स की बुद्धिमत्ता और सीखने की क्षमता भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। विद्यार्थियों को बताया गया कि कई Monkeys में सीखने और स्मरण करने की उल्लेखनीय क्षमता होती है, जबकि Apes में समस्या-समाधान और जटिल कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। Chimpanzees द्वारा उपकरणों के उपयोग तथा Orangutans से जुड़े शोध उदाहरणों के माध्यम से प्राइमेट intelligence को समझाया गया।
व्याख्यान में Tarsiers की विशिष्ट विशेषताओं के बारे में भी जानकारी दी गई। उनके बड़े नेत्र, लंबे पैर और लंबे digits के साथ-साथ उनकी वृक्षीय जीवन-शैली के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि Tarsiers मुख्यतः कीटों और छोटे vertebrates का शिकार करते हैं तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के वनों में पाए जाते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्राइमेट्स के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा पैदा करने के साथ जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि प्राइमेट्स केवल मनुष्य के जैविक रिश्तेदार ही नहीं, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक भी हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।



