लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 16 गिरफ्तार

अमेरिकी नागरिकों को बनाते थे निशाना, फर्जी माइक्रोसॉफ्ट एजेंट बनकर करते थे ठगी; 36 लैपटॉप समेत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
लखनऊ। अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित रिध्या प्लाजा में संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कमिश्नरेट लखनऊ की अलीगंज पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में 12 पुरुष और 4 महिलाओं समेत कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर से मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर की सुबह करीब 4 बजे अलीगंज पुलिस क्षेत्र में गश्त और चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान रिध्या प्लाजा के पास एक संदिग्ध व्यक्ति मिला। पूछताछ में उसने प्लाजा में काम करने की बात बताई। समय असामान्य होने पर पुलिस को संदेह हुआ और परिसर की जांच की गई। जांच के दौरान वहां कॉल सेंटर संचालित मिला। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ छानबीन में साइबर फ्रॉड से जुड़े होने की जानकारी सामने आने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 16 लोगों को पकड़ लिया।

ऐसे करते थे अमेरिकी नागरिकों से ठगी
पूछताछ में पुलिस के मुताबिक सामने आया कि कॉल सेंटर में एजेंट, वेरिफायर और क्लोजर नाम से तीन स्तरों पर काम होता था। सबसे पहले अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर फर्जी पॉप-अप और वायरस अथवा सुरक्षा संबंधी चेतावनी दिखाई जाती थी। इसके बाद पॉप-अप में दिए गए नंबर पर पीड़ित द्वारा कॉल करने पर उसे कॉल सेंटर के एजेंट से जोड़ा जाता था।

एजेंट खुद को माइक्रोसॉफ्ट का कर्मचारी या ग्लोबल टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर पीड़ित को भरोसे में लेते थे। इसके बाद UltraViewer जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए कंप्यूटर का एक्सेस लिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद फर्जी सिक्योरिटी स्कैन कर पीड़ित को डराया जाता था कि उसके कंप्यूटर से पोर्नोग्राफी वेबसाइट, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, ड्रग स्मगलिंग अथवा अन्य अवैध गतिविधियों से संबंधित सामग्री मिली है। भयभीत करने के बाद पीड़ित से व्यक्तिगत और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल की जाती थीं।
क्लोजर टीम बनकर सरकारी अधिकारी करते थे ब्लैकमेल
एजेंट द्वारा जुटाई गई जानकारी वेरिफायर टीम को दी जाती थी। वेरिफायर पीड़ित से दोबारा संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करता था। इसके बाद मामला क्लोजर टीम को भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक, क्लोजर टीम के सदस्य खुद को विभिन्न सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर पीड़ित को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। इसके बाद विभिन्न माध्यमों से रकम ट्रांसफर कराई जाती थी।
पुलिस के अनुसार, रकम गिफ्ट कार्ड, बैंक ट्रांसफर और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ली जाती थी।
मुख्य आरोपी प्रियांशु फरार
पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर का संचालन शिवा उर्फ प्रियांशू द्वारा किया जा रहा था, जो फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। वहीं नेहल और आशीष कॉल सेंटर के संचालन और प्रबंधन में प्रमुख भूमिका निभाते थे। इनके जिम्मे कर्मचारियों की एंट्री, उपस्थिति, भर्ती और ट्रेनिंग समेत अन्य काम थे।
कर्मचारियों को कथित तौर पर 18 हजार से 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, उनके रहने और भोजन की व्यवस्था भी निःशुल्क की जाती थी।
36 लैपटॉप समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से
36 लैपटॉप, 20 माउस, 22 हेडफोन, 32 लैपटॉप चार्जर, 5 राउटर, 20 व्यक्तिगत मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, सभी डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनकी तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इससे साइबर ठगी के नेटवर्क, संभावित पीड़ितों, कॉलिंग मॉड्यूल और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
अलीगंज थाने में मुकदमा दर्ज
पुलिस ने मामले में थाना अलीगंज में मु0अ0सं0 180/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं 3(5), 61(2), 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 339, 340(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66C/66D में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सहयोगियों और वित्तीय लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस टीम को 25 हजार का पुरस्कार
साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का खुलासा करने वाली अलीगंज पुलिस टीम को पुलिस उपायुक्त उत्तरी की ओर से 25 हजार रुपये नगद पुरस्कार दिया गया है। वहीं कांस्टेबल विपिन कुमार वर्मा को उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य के लिए अलग से 5 हजार रुपये नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।



