गौशाला में भूख से गायों की मौत, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
कंकाल जैसी हालत में मिले आधा दर्जन से अधिक गौवंश के शव, जांच की मांग तेज

मथुरा/नौहझील
मथुरा जनपद के नौहझील ब्लॉक अंतर्गत ग्राम रामनगला पलखेड़ा के पास स्थित गौशाला में एक बार फिर बेहद शर्मनाक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। गौशाला परिसर में आधा दर्जन से अधिक गायों के शव कंकाल जैसी हालत में पड़े मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना ने गौवंश संरक्षण की सरकारी व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बीते करीब तीन महीनों से गौशाला में गायों को न तो पर्याप्त चारा मिल रहा था और न ही समुचित देखभाल की जा रही थी। भूख, बीमारी और लापरवाही के चलते एक-एक कर गायों की मौत होती रही, लेकिन जिम्मेदारों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रधान की भूमिका पर भी सवाल
मामले में ग्राम पंचायत रामनगला के प्रधान की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह गौशाला पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है, लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सीएम के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौवंश संरक्षण को लेकर लगातार सख्त निर्देश देते रहे हैं। आदेश हैं कि गौशालाओं में गायों को पर्याप्त चारा, साफ पानी और चिकित्सा सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। इसके बावजूद नौहझील की यह गौशाला सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
पशु चिकित्साधिकारी का बयान
इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र नारायण शुक्ला ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर टीम को मौके पर भेजा गया है। गायों की मौत के कारणों की जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग
- स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए
- गौशाला की व्यवस्थाओं की तत्काल समीक्षा कर चारा-पानी और इलाज की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह घटना न केवल गौशालाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि सरकारी आदेश आखिर कागजों तक ही क्यों सिमट कर रह जाते हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।



