उत्तराखंड

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बना सुशासन का मॉडल, 3 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची धामी सरकार

395 शिविरों में 32 हजार से ज्यादा शिकायतें, 22 हजार मामलों का त्वरित निस्तारण

देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। इस पहल के तहत राज्य के सभी 13 जनपदों में लगातार जनसेवा शिविर आयोजित कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश भर में अब तक 395 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। इन शिविरों में कुल 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े सरकार की प्रशासनिक तत्परता और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
शिविरों के दौरान विभिन्न प्रमाण पत्रों और शासकीय सेवाओं के लिए 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को अलग-अलग जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया। सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना रहा है, जो इस कार्यक्रम के माध्यम से जमीन पर साकार होता दिख रहा है।

जनपदों में दिखा जबरदस्त उत्साह
जनपदवार भागीदारी पर नजर डालें तो देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ में बड़ी संख्या में लोगों ने शिविरों में हिस्सा लिया।

  • देहरादून में 41,889 नागरिकों ने सहभागिता की
  • हरिद्वार में 64,686 लोगों ने लाभ उठाया
  • ऊधम सिंह नगर में 24,421
  • अल्मोड़ा में 24,771 नागरिक लाभान्वित हुए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है, जिसके माध्यम से शासन को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचाया जा रहा है।

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