उत्तर प्रदेश

शौचालय में 10–20 रुपये शुल्क, दुकानें-विज्ञापन भी चालू; ‘हाईटेक हेल्प हैंड्स’ की भूमिका पर उठे सवाल

सामाजिक सेवा के नाम पर सबसे महंगी सुविधाएं! नगर निगम मुख्यालय के सामने बना सामुदायिक केंद्र सवालों के घेरे में

लखनऊ।
नगर निगम मुख्यालय के ठीक सामने, झंडी पार्क के कोने पर संचालित हाईटेक हेल्प हैंड्स सामुदायिक सुविधा केंद्र इन दिनों विवादों में घिर गया है। खुद को सामाजिक सेवा संस्थान बताने वाली इस संस्था द्वारा आम जनता से वसूले जा रहे शुल्क ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस परिसर में संस्था द्वारा दुकानें, विज्ञापन स्थल, कार्यालय, शौचालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां बने सुलभ शौचालय में आम लोगों से 10 से 20 रुपये तक शुल्क वसूला जा रहा है।
सवाल यह उठता है कि जब संस्था का उद्देश्य सामाजिक सेवा बताया जा रहा है, तो फिर इतनी अधिक फीस क्यों ली जा रही है?
इसके अलावा परिसर में ‘सुविधा केश’ (हेयर कटिंग सैलून) का संचालन भी किया जा रहा है, जो पूरी तरह से एक कमर्शियल गतिविधि मानी जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
➡️ इस पूरे परिसर से नगर निगम को कितनी आय हो रही है?
➡️ किराया, विज्ञापन, दुकानों और शुल्क वसूली का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा मौजूद है या नहीं?
➡️ नगर निगम की जमीन पर हो रही इन गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर दी गई?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सामाजिक सेवा के नाम पर चल रही कमर्शियल गतिविधियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए। यह मामला केवल शुल्क का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नगर निगम की संपत्ति के सही उपयोग से जुड़ा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महापौर और नगर निगम प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इस कथित सामाजिक संस्था के कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।

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