मंदिर’ बना इंदु मेडिकल सेंटर, सड़क सुरक्षा को लेकर डॉक्टर की अनोखी पहल

लखनऊ।
राजधानी लखनऊ में इंदु मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर (Indu Medical Centre), अलीगंज, लखनऊ में स्थित एक स्थापित बहु-विशिष्ट (Multi-specialty) अस्पताल है। यह मां विंध्याचल मंदिर के पास (सेक्टर-K) स्थित है, जो मधुमेह, स्त्री रोग, सामान्य सर्जरी, हृदय रोग और दंत चिकित्सा जैसी सेवाओं के लिए जाना जाता है। यह केंद्र आपातकालीन देखभाल और अत्याधुनिक चिकित्सा उपचार प्रदान करता है। इंदु मेडिकल सेंटर सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए किसी मंदिर से कम नहीं माना जा रहा है। यहां आने वाले मरीज न सिर्फ इलाज पाते हैं, बल्कि उन्हें परिवार जैसा माहौल भी मिलता है। डॉ रजनीश श्रीवास्तव को लोग भगवान के समान मानते हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यहां अब तक आए अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं। मरीजों की देखभाल इस तरह की जाती है कि वे अपना दर्द और चिंता भूल जाते हैं। स्टाफ का व्यवहार भी घर के सदस्यों जैसा बताया जाता है।
90 प्रतिशत रिकवरी के साथ बच्चे को नई जिंदगी
हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल एक बच्चे को अस्पताल की आईसीयू टीम ने नई जिंदगी दी। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे की 90 प्रतिशत रिकवरी हो चुकी है। इस सफलता के बाद अस्पताल प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।
सड़क हादसों पर चिंता
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं बड़ी समस्या बन चुकी हैं। विडंबना यह है कि भारतीय विदेशों में यातायात नियमों का पालन करते हैं, लेकिन अपने देश में लापरवाही बरतते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ ट्रैफिक पुलिस के भरोसे व्यवस्था नहीं सुधर सकती, इसके लिए आम नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने अपील की कि यदि लोग केवल पांच मिनट पहले निकलें और वाहन की रफ्तार थोड़ी धीमी रखें तो कई परिवारों के चिराग बुझने से बच सकते हैं।
सोशल मीडिया से जागरूकता अभियान
डॉ. श्रीवास्तव ने एक अनोखी पहल करते हुए अपने मित्र त्रिपाठी जी का नाम टैग कर उन्हें भी गाड़ी धीमी चलाने का संकल्प लेने का आग्रह किया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील की कि वे भी अपने एक मित्र को टैग कर इस अभियान को आगे बढ़ाएं। अस्पताल प्रशासन ने सभी देशवासियों से अनुरोध किया है कि सड़क पर कार और बाइक चलाते समय गति नियंत्रित रखें और यातायात नियमों का पालन करें, ताकि खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रख सकें।



