कभी शान रही विक्टोरिया स्ट्रीट, अब बदहाली की तस्वीर
अतिक्रमण और अव्यवस्था ने ‘सबसे चौड़ी सड़क’ को बना दिया सबसे बड़ी परेशानी

लखनऊ। कभी लखनऊ की सबसे चौड़ी और अहम सड़कों में शुमार रही विक्टोरिया स्ट्रीट आज बदहाली की मिसाल बनती जा रही है। अंग्रेजी दौर में इंग्लैंड की रानी के नाम पर बनी यह सड़क मुख्य शहर चौक को बाहरी इलाकों से जोड़ने का प्रमुख रास्ता हुआ करती थी। यही नहीं, यह सड़क किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (अब केजीएमयू) को कानपुर रोड से भी जोड़ती है। लेकिन वक्त के साथ शहर की यह ऐतिहासिक सड़क अब अव्यवस्था, अतिक्रमण और प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ चुकी है।
विक्टोरिया स्ट्रीट से जुड़े मिल रोड, तालकटोरा, हैदरगंज, बाजार खाला, नक्खास, अकबरी गेट और पाटा नाला जैसे इलाके आज शहर के सबसे परेशानहाल क्षेत्रों में गिने जा रहे हैं। यहां लाखों की आबादी रोज जाम, गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रही है।
पुल बने, मगर नीचे हाल बदतर
इस सड़क पर दो फ्लाईओवर बनाए गए—एक नींबू पार्क से हैदरगंज और दूसरा मीना बेकरी के आगे तक। इन पुलों से ऊपर निकलने वालों को तो राहत मिल जाती है, लेकिन पुलों के नीचे रहने और आने-जाने वालों की हालत और खराब हो गई है।
अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और धड़ल्ले से हुए अवैध निर्माण ने सड़कों की चौड़ाई को निगल लिया है। हाल यह है कि कई जगह दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
नक्खास की तस्वीरें दे रहीं बड़ा खतरा
नक्खास बाजार से सामने आई तस्वीरें हालात की गंभीरता बयां करती हैं। संकरी गलियां, दोनों ओर कब्जे और बेतरतीब खड़े वाहन—ऐसे में अगर कहीं आग लग जाए तो सवाल उठता है कि दमकल की गाड़ियां मौके तक पहुंचेंगी कैसे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की स्थिति में जान-माल का नुकसान तय है, क्योंकि रास्ते ही गायब हो चुके हैं।
कौन जिम्मेदार?
इस बदहाली के लिए लोग एलडीए, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन सभी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही अवैध निर्माण पर सख्ती की गई। नतीजा यह है कि ऐतिहासिक विक्टोरिया स्ट्रीट आज पहचान खोती जा रही है और यहां रहने वाले लोग खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।
शहरवासियों का सवाल साफ है—
क्या लखनऊ की यह ऐतिहासिक सड़क यूं ही अतिक्रमण और अव्यवस्था की बलि चढ़ती रहेगी, या प्रशासन जागकर इसे फिर से उसकी पहचान दिलाएगा?



